भारत के पूर्वी क्षेत्र को कुदरत ने खनिजों से नवाज़ा है, ख़ासकर पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार. इन क्षेत्रों में वैसे तो सभी तरह के अयस्क और खनिज़ पाए जाते हैं, लेकिन ख़ासतौर पर यह खनिज़ पट्टी कोयले के उत्खनन के लिए जानी जाती है. इसी क्षेत्र में कोयले के गुब्बार में सनी एक जगह है, झरिया. झरिया झारखंड राज्य के अंदर आता है. यहां कोयले की अनेक खदाने हैं. इन्हीं खदानों में से एक खदान में कोयला उत्खनन के लिए पिछले 100 सालों से आग जलाई गयी है. इस जलती खदान और इससे निकलने वाले धुंए से सराबोर इसके आस-पास की बस्तियों के जीवन पर भारतीय फोटोग्राफर Ronny Sen ने बेहतरीन तस्वीरें कैप्चर की हैं. इन तस्वीरों के लिए उन्हें संयुक्त रूप से Getty Instagram Award से भी नवाज़ा गया है.
इन बेहतरीन तस्वीरों में आप कोयला खदान और इसके आस-पास पनपने वाले जीवन के अनछुए पहलुओं को करीब से देख सकते हैं.
किसी समय यहां पर हरे-भरे जंगल हुआ करते थे, लेकिन कोयले की खोज के बाद वो धीरे-धीरे अपना वजूद खोते गये.

100 सालों से जलती आ रही इस आग की राख़ ने अब खदान के बाहर के क्षेत्र को भी अपने धुंए के बादलों में लपेट लिया है.

यह जलती हुई आग सुनहरी लाली लिए हुए है, जो देखने में जितनी सुन्दर है, हकीकत में उतनी ही भयानक.

यह भगवा दीवार सबूत है, इस बात का कि कोयले के धमाकों ने मन्दिर की दीवारों को भी जगह छोड़ने पर मजबूर कर दिया है.

झरिया में 18वीं सदी में कोयले की खदानों की खोज़ हुई थी.

यहां कुछ परिवार ऐसे है, जहां मां और बाप खदान के अंदर आग में तप रहे होते हैं और उनके बच्चे खदान के बाहर उसी आग के धुंए में लिपटे पड़े होते हैं.

पेट की आग, कोयले की आग की परवाह नहीं करती और यह काम दिनों-रात चलता रहता है.

कुछ लोगों की ज़िन्दगी यहां ठहर-सी गई है.

एक शख्स पूरे दिन-भर में महज़ 100 रुपये में 5 ट्रकों को कोयला भर के भेज देता है और ख़ुद खाली रह जाता है.

प्रेम और मजबूरी का गठजोड़ इंसान को इंसान का हाथ थामने पर मजबूर कर ही देता है.

इन तस्वीरों में वाकई में वो बात है, जो शब्दों में बांधने पर भी नहीं बांधी जा सकती. इस निशब्द कारवां को आगे बढ़ाते हुए, आप भी इस आर्टिकल को शेयर कर डालिए.
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